कैथरीन मैन्सफील्ड

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
कैथरीन मैन्सफील्ड
Mansfield 1917 cropped.jpg
कैथरीन मैन्सफील्ड 1917 में
जन्म 14 अक्टूबर 1888
वेलिंगटन, न्यूजीलैंड
मृत्यु 9 जनवरी 1923(1923-01-09) (उम्र 34)
फाॅन्टेनब्लू, फ्रांस
उपनाम कैथरीन मैन्सफील्ड
राष्ट्रीयता न्यूजीलैंड (British subject)
साहित्यिक आन्दोलन आधुनिकतावाद
जीवनसाथी जाॅर्ज बाउडन, जाॅन मिडल्टन मरी
साथी इडा काॅन्स्टेंस बेकर
सम्बन्धी आर्थर बोशैम्प(पितामह)
हैरोल्ड बोशैम्प (पिता)
ऐनी डायर (माता)

कैथरीन मैन्सफील्ड ((अंग्रेज़ी):Katherine Mansfield) (१४ अक्टूबर, १८८८ - ९ जनवरी, १९२३) न्यूज़ीलैण्ड मूल की अत्यधिक ख्यातिप्राप्त आधुनिकतावादी अंग्रेजी कहानीकार थी। बैंकर पिता तथा अपेक्षाकृत संकीर्ण स्वभाव वाली माता की पुत्री कैथरीन नैसर्गिक रूप से ही स्वच्छंद स्वभाव वाली हुई। परंपरागत रूप से स्त्रियों का अनिश्चित भविष्य वाला जीवन उसमें आरंभ से ही विद्रोह का बीज-वपन करते रहा। अपने जीवन को अपेक्षित मोड़ न दे पाने के कारण उसका स्वभाव असंतुलित और जीवन अव्यवस्थित होते रहा। आरंभ में जीवन की कठोरताओं ने उसकी रचनाओं को भी कटुता तथा तीखे व्यंग्य से पूर्ण बनाया। काफी समय तक वह जीवन में उत्तमता एवं व्यवस्था के औचित्य को स्वीकार नहीं कर पायी। काफी बाद में चेखव के प्रभाव से उसने लेखन के साथ लेखक के जीवन में भी अच्छाई का महत्व समझा। कैथरीन आधुनिकतावादी कहानीकार थी तथा अपनी रचनाओं की भावात्मक शैली एवं प्रयुक्त प्रतीकात्मकता को यथासंभव यथार्थवादिता से किनारा नहीं करने देती थी। इसके साथ ही उसकी रचनाओं में आद्यन्त विद्यमान पठनीयता भी अतिरिक्त वैशिष्ट्य प्रदान करती है।

जीवन-परिचय

कैथरीन मैंसफील्ड का जन्म १४ अक्टूबर १८८८ को न्यूजीलैंड के वेलिंगटन में हुआ था। उसका मूल नाम कैथलीन मैन्सफील्ड बोशैम्प था। उसके पिता हैरोल्ड बोशैम्प एक सफल बैंकर थे। उसकी माँ ऐनी डायर स्वभाव वाली तथा अपने आप में सिमटी रहने वाली महिला थीं, परंतु उन्हीं की पुत्री कैथरीन मैन्सफील्ड अपनी माँ से सर्वथा विपरीत स्वभाव वाली हुई। कैथरीन के बचपन के ६ वर्ष करोरी नामक गाँव में बीता। बचपन से ही उसे सार्थक या निरर्थक कुछ न कुछ लिखते रहने का शौक था। ९ वर्ष की अल्पावस्था में ही उसका लिखा कुछ प्रकाशित भी हुआ था। १५ वर्ष की आयु में ही उसने विद्रोही स्वभाव का पहला परिचय दिया और परिवार की इच्छा के विरुद्ध हठपूर्वक लंदन के क्वींस कॉलेज में दाखिला ले लिया। क्वींस कॉलेज स्त्रियों की उदारवादी शिक्षा के लिए प्रसिद्ध था। परंतु, कैथरीन को ३ वर्ष बाद ही अपनी इच्छा के विरुद्ध न्यूजीलैंड वापस लौटना पड़ा।

आरंभ में कैथरीन को संगीत से काफी लगाव था और न्यूजीलैंड लौटने पर भी वह पेशेवर चेलो-वादक बनना चाहती थी परंतु उसके पिता ने इसकी स्वीकृति नहीं दी। 1908 में अपनी अंतरंग मित्र इडा बेकर की सहायता से वह पिता को राजीकर इंग्लैण्ड जाने में सफल हुई और फिर कभी लौटकर न्यूजीलैंड नहीं आयी।

लंदन में कैथरीन पूरी तरह लेखन में तत्पर हो गयी। अपनी मातृभूमि से हमेशा के लिए दूर हो जाने के बावजूद उसके लेखन में उसकी मातृभूमि (न्यूजीलैंड) की आवाजाही होती रही। विरोधाभासी व्यवहार कैथरीन का स्वभाव था। वह अकसर कहती थी कि उसे इंग्लैंड की हर चीज नापसन्द है। दूसरी ओर उसके कई समकालीनों का कहना था कि वह कुछ ज्यादा ही "अंग्रेज" थी।[1]

प्रेम, विवाह एवं स्वभाव का असंतुलन

कैथरीन का पहला प्यार गार्नेट ट्रावेल नामक युवा वायलिन वादक से हुआ था, लेकिन कुछ समय उपरांत यह रिश्ता टूट गया और उसी आवेश में उसने एक संगीत शिक्षक जॉर्ज बाउडन से विवाह कर लिया। यह विवाह एक दिन भी नहीं निभ पाया और कैथरीन अगले ही दिन उसे छोड़ कर चली गयी। कुछ दिनों तक एक ओपेरा मंडली के साथ घूमती रहने के बाद वह पुनः गार्नेट के पास लौट गयी। कुछ समय बाद उसे खुद के गर्भवती होने का पता चला और उसके खराब स्वास्थ्य के कारण उसकी माँ उसे बवेरिया के एक सेनेटोरियम में ले गयी जहाँ उसने असमय एक मृत बच्चे को जन्म दिया। १९१० में ही उसे गोनोरिया हो गया था, जिसके कारण वह जीवन भर अस्वस्थ रही।

१९११ में कैथरीन की भेंट रिद्म पत्रिका के संपादक जॉन मिडलटन मरी से हुई। जल्दी ही दोनों में घनिष्ठता हुई और मरी कैथरीन के ही फ्लैट में रहने लगा। इसी दौरान कैथरीन की गहरी मित्रता डी॰ एच॰ लारेंस तथा उसकी पत्नी फ्रीडा से भी हुई। अपने स्वभाव की अस्थिरता तथा उद्विग्नता के कारण जीवन भर कैथरीन का किसी से लगातार अच्छा संबंध नहीं रहा। संबंधों में उतार चढ़ाव हमेशा लगा रहा।

१९१८ के आरंभ में कैथरीन को तपेदिक (टीबी) की बीमारी हो गयी। इसी वर्ष उसने जॉर्ज बाउडन को औपचारिक रूप से तलाक लेकर मरी से बाकायदा विवाह किया। 1920 में वह फ्रांस के मेन्तो शहर में किराए के बंगले में रहने लगी। वहीं उसने अपनी अनेक सफलतम कहानियाँ लिखीं।

लगातार खराब स्वास्थ्य तथा रोग के लाइलाज हो जाने से मात्र ३४ वर्ष की आयु में ९ जनवरी १९२३ को फोन्तेनब्लो में कैथरीन का देहांत हो गया।

जीवन से पनपती रचनाशीलता

जैसा कि उल्लेख किया गया है कैथरीन आरंभ से ही मुक्त स्वभाव की थी। 16 साल की उम्र में अपनी स्कूली दोस्त को लिखे पत्र में उसकी स्वाभाविक स्वतंत्रता की स्पष्ट झलक मिलती है: मैं किस कदर चाहती हूँ कि सभी स्त्रियों का एक निश्चित भविष्य हो-- क्या तुम नहीं चाहती? बैठे-बैठे एक अदद पति का इंतजार करने के ख्याल से ही मुझे सख्त नफरत है, लेकिन बहुतेरी लड़कियाँ तो ऐसे ही सोचती हैं। ... तुम्हारी इस ख्वाहिश के बारे में पढ़कर मैं मुस्कुरा उठी कि तुम अपनी तकदीर खुद बनाना चाहती हो-- ओह, कितनी ही बार मैंने खुद भी ऐसा ही महसूस किया है। मेरी ललक है कि मैं परिस्थितियों को अपने वश में कर सकूँ।[2]

प्रेम, टूटन, विवाह और दूरी के जोरदार थपेड़ों ने स्वभावतः कैथरीन के स्वभाव में कुछ कटुता और तीखा व्यंग्य भर दिया था। इसलिए उस दौर में लिखी उस की कहानियाँ तीखे व्यंग्य से भरी है। ये कहानियाँ 1911 में प्रकाशित उसके प्रथम कहानी संग्रह इन ए जर्मन पेंशन में संकलित हुई हैं। केवल 23 वर्ष की उम्र में प्रकाशित इस संग्रह की कहानियों में जर्मन मध्यवर्ग के आडंबर एवं पाखंड का मजाक उड़ाया गया है। इन कहानियों की प्रशंसा हुई और एक स्पष्टवादी, हाजिरजवाब तथा तेज-तर्रार प्रतिभा के रूप में कैथरीन को साहित्य जगत् में स्वीकृति मिल गयी।

बीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक में अंग्रेजी कहानी ने उपन्यास से भिन्न मार्गों का अनुसरण किया। इसका प्रमुख कारण था रूसी लेखक चेखव का प्रभाव जिसने कथानक और दृढ़ चरित्र-चित्रण पर नहीं बल्कि वातावरण के निर्माण पर अपना ध्यान केन्द्रित किया।[3]

कैथरीन चेखव से अत्यधिक प्रभावित थी और उक्रेनी लेखक एस० एस० कोतेलिआंस्की के साथ मिलकर उसने बाद में चेखव के पत्रों का रूसी से अंग्रेजी में अनुवाद भी किया। हालाँकि ए० सी० वार्ड के अनुसार कैथरीन की शैलीगत समानता ही चेखव से अधिक थी। उन्होंने लिखा है कि कैथरीन मैन्सफील्ड के विषय में जितना उस समय सोचा जाता था कदाचित् उससे कम ही वह चेखव की शिष्या थी, यद्यपि उसकी शैली किसी अंग्रेज लेखक की अपेक्षा चेखव की शैली से अधिक मिलती-जुलती थी।[4]

बहुत बाद में चेखव के जीवन से ही उसे यह एहसास भी हुआ कि अच्छे लेखक का जीवन भी अच्छा होना चाहिए और उसने यथासंभव ऐसा प्रयत्न भी किया; परंतु उससे पहले तो अपने अस्थिर एवं असंतुलित स्वभाव के चलते उसने बड़े संकट भी झेले और बड़े उथल-पुथल भी पैदा किये। मिडलटन मरी से भी संबंध बनते-बिगड़ते रहा[5] और १९१५ में एक बार उसे छोड़ कर वह बोहेमियन फ्रांसीसी लेखक और पत्रकार फ्रांसिस कार्को से युद्ध क्षेत्र में मिलने के बाद उसी के घर में रहने भी चली गयी थी। यह प्रेमप्रसंग संक्षिप्त ही रहा और इसी पृष्ठभूमि पर उसने अपनी कहानी ऐन इनडिस्क्रीट जर्नी लिखी थी।

कैथरीन अपने छोटे भाई लेस्ली से बहुत स्नेहभाव रखती थी। उसके प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना में शामिल हो जाने तथा अक्टूबर १९१५ में बेल्जियम में मारे जाने से वह अत्यधिक व्यथित हुई[5] तथा अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर लिखे जा रहे उपन्यास 'द एलो' में उसका दर्द गहरी संवेदना के रूप में प्रकट होते रहा। १९१७ में वर्जीनिया वुल्फ द्वारा प्रकाशन हेतु कहानी माँगने पर उसने इसी उपन्यास की कथावस्तु को एक लंबी कहानी के रूप में ढाल दिया, जो उसकी सुप्रसिद्ध लंबी कहानी प्रेल्यूड के रूप में सामने आयी। कैथरीन की आशंकाओं के विपरीत इस कहानी की अच्छी-खासी प्रशंसा हुई। इसमें निहित सघन एवं सजीव भावनात्मकता के साथ प्रतीकात्मकता तथा यथार्थवाद की सहवर्तिता काफी प्रशंसनीय सिद्ध हुई। उपन्यासकार 'रेबेका वेस्ट' ने इसे एक जीनियस की कृति स्वीकार किया था। वस्तुतः उसकी शैली सावधानीपूर्वक सुगठित परंतु भावनात्मक थी। इसके साथ ही उसमें बच्चों तथा दुखी और भग्न-हृदय पराजित व्यक्तियों को समझने की असाधारण क्षमता थी।[4]

मैन्सफील्ड के रचनात्मक जीवन का सर्वाधिक फलप्रद दौर 1920 में फ्रांस में निवास करने का था। उनकी अनेक सफलतम कहानियाँ वहीं लिखी गयीं। मिस ब्रिल, दि स्ट्रेंजर (अजनबी), दि डॉटर्स ऑफ दि लेट कर्नल (दिवंगत कर्नल की बेटियाँ), एट द बे (खाड़ी के किनारे), हर फर्स्ट बॉल (उसका पहला नाच), द गार्डन पार्टी आदि कैथरीन के यश को तेजोद्दीप्त करने वाली इसी दौर की कहानियाँ हैं जो उसके तीसरे कहानी संग्रह द गार्डन पार्टी में संकलित हैं।

अपनी बीमारी के लाइलाज साबित होने पर जीवन की नश्वरता, युद्ध तथा साहस जैसे भावों को केंद्र में रखती उसकी प्रसिद्ध कहानी दि फ्लाई आयी थी। आखिरी कहानी दि कैनरी में उसके आभासित अंत की निराशा तथा लेखन की सीमाओं के प्रति आकुलता भी व्यक्त हुई है।

राबर्ट गोरहम डेविस का मानना है कि महान् कहानी लेखिकाओं में कैथरीन मैन्सफील्ड ऐतिहासिक दृष्टि से सर्वाधिक प्रभावशाली और पढ़ी जाने वाली कहानीकार हैं। समय अथवा अतिपरिचय इन कहानियों को बासी नहीं कर पाता।[6]

प्रकाशित पुस्तकें

  • कहानी-संग्रह
  1. इन ए जर्मन पेंशन (1911)
  2. ब्लिस एण्ड अदर स्टोरीज़ (1920)
  3. द गार्डन पार्टी (1923)
  4. डव्स नेस्ट एण्ड अदर स्टोरीज़ (1923)
  5. समथिंग चाइल्डिश (1924)
  • कविता-संग्रह - 1923
  • पत्र एवं डायरियाँ -1927

इनके अतिरिक्त बाद में असंकलित रचनाओं के संकलनों के साथ 'समग्र रचनाएँ' भी प्रकाशित।

इन्हें भी देखें

बाहरी कड़ियाँ

सन्दर्भ

  1. गार्डन पार्टी और अन्य कहानियाँ ('द गार्डन पार्टी' का अविकल हिंदी अनुवाद), अनुवादक- शाहिद अख्तर, सं०- कात्यायनी एवं सत्यम, राजकमल प्रकाशन प्रा० लि०, नयी दिल्ली, संस्करण-2007, पृ०-XII
  2. गार्डन पार्टी और अन्य कहानियाँ ('द गार्डन पार्टी' का अविकल हिंदी अनुवाद), पूर्ववत्, पृ०-XI-XII
  3. अंग्रेजी साहित्य का इतिहास, विलियम हेनरी हडसन एवं ए० सी० वार्ड, अनुवादक- जगदीश बिहारी मिश्र, हिंदी समिति, सूचना विभाग, उत्तर प्रदेश, संस्करण-1963, पृष्ठ-365-366.
  4. अंग्रेजी साहित्य का इतिहास, पूर्ववत्, पृष्ठ-366.
  5. गार्डन पार्टी ('द गार्डन पार्टी' की तीन कहानियों सहित विभिन्न संकलनों से संकलित कुल 10 कहानियों का हिंदी अनुवाद), अनुवादक- संजीव मिश्र, वाग्देवी प्रकाशन, बीकानेर, संस्करण-1998, पृ०-6.
  6. गार्डन पार्टी, अनु०-संजीव मिश्र, पूर्ववत्, अंतिम आवरण पर उद्धृत।